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बुधवार, 15 अक्तूबर 2014

इंद्रभूति के पश्चात् 8वीं शताब्दी में उनके पुत्र पद्मसंभव ने योग्यता पूर्वक इस तांत्रिक पीठ को संचालित किया। वे भी अपने पिता के समान सिद्ध पुरुष थे। बाद में शांति रक्षित की अनुशंसा पर तिब्बत नरेश रव्रीसोंगल्दे वत्सन ने पद्मसंभव को तिब्बत बुलवा लिया। वत्सन का शासन काल 755 से 797 ईसवी तक माना जाता है।

रचनाकार: अश्विनी केशरवनी का पुस्तक संक्षेप : शिवरीनारायण के देवालय और परंपराएं

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